पेरिमेनोपॉज (Perimenopause) क्या होता है? मतलब, लक्षण, उम्र और इलाज

पेरिमेनोपॉज यानी मेनोपॉज से पहले के वे साल, जब हार्मोन ऊपर-नीचे होते हैं और पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं। जानिए इसका मतलब, लक्षण, उम्र, जाँच और इलाज, आसान हिंदी में।

Perimenopause meaning in Hindi – NuHer women's health article

पेरिमेनोपॉज (Perimenopause) का मतलब है "मेनोपॉज से पहले का समय", यानी वे कुछ साल जब शरीर धीरे-धीरे मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) की ओर बढ़ता है। इस दौरान अंडाशय (ओवरी) के हार्मोन ऊपर-नीचे होते हैं, पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं, और गर्मी लगना, नींद ख़राब होना, चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण शुरू होते हैं। पेरिमेनोपॉज तब ख़त्म होता है जब आख़िरी पीरियड को 12 महीने पूरे हो जाते हैं।

बहुत सी महिलाएँ 40 की उम्र के आसपास पहली बार सोचती हैं, "मुझे क्या हो रहा है?" पीरियड्स का पैटर्न बदल जाता है, रात में नींद टूटती है, छोटी बातों पर ग़ुस्सा आता है, और घर वाले कहते हैं "बस थकान है" या "उम्र हो रही है"। अक्सर यह पेरिमेनोपॉज होता है। अंग्रेज़ी में विस्तृत जानकारी के लिए हमारी पेरिमेनोपॉज गाइड देखें।

पेरिमेनोपॉज क्या होता है? (Perimenopause kya hota hai)

"पेरि" का मतलब है "आसपास"। यानी पेरिमेनोपॉज वह दौर है जो मेनोपॉज के आसपास, ख़ासकर उससे पहले आता है। बोलचाल में कई लोग इसे "प्री-मेनोपॉज" भी कहते हैं, और डॉक्टर इसे "मेनोपॉजल ट्रांज़िशन" (menopausal transition) भी कहते हैं।

प्रजनन उम्र में अंडाशय हर महीने एस्ट्रोजन (estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (progesterone) बनाते हैं। 40 की उम्र के आसपास अंडाशय में अंडे कम होने लगते हैं और हार्मोन का बनना अनियमित हो जाता है। कुछ महीनों में एस्ट्रोजन सामान्य से ज़्यादा हो सकता है, तो कुछ में बहुत कम। प्रोजेस्टेरोन आमतौर पर पहले घटता है, क्योंकि अब हर महीने अंडा नहीं बनता। हार्मोन का यही उतार-चढ़ाव पेरिमेनोपॉज के ज़्यादातर लक्षणों की वजह है।

डॉक्टर महिला के प्रजनन जीवन के इन चरणों को एक अंतरराष्ट्रीय पैमाने (STRAW+10) से समझते हैं:

  • शुरुआती पेरिमेनोपॉज: पीरियड्स अभी आते हैं, लेकिन उनके बीच का अंतर बदलने लगता है। लगातार दो साइकिल की लंबाई में 7 दिन या उससे ज़्यादा का फ़र्क बार-बार दिखता है।
  • बाद का पेरिमेनोपॉज: पीरियड्स 60 दिन या उससे ज़्यादा के लिए छूटने लगते हैं। इसी समय हॉट फ्लैश सबसे ज़्यादा होने की संभावना होती है।
  • मेनोपॉज: आख़िरी पीरियड के 12 महीने बाद।
  • पोस्टमेनोपॉज: मेनोपॉज के बाद का पूरा जीवन।

पेरिमेनोपॉज किस उम्र में शुरू होता है?

ज़्यादातर महिलाओं में पेरिमेनोपॉज 40 से 45 साल के बीच शुरू होता है, लेकिन कुछ में 30 के आख़िरी सालों में भी हो सकता है। भारत में मेनोपॉज की औसत उम्र लगभग 46 साल है (इंडियन मेनोपॉज सोसायटी का देशव्यापी सर्वे), जो पश्चिमी देशों के लगभग 51 साल के औसत से पहले है। इसलिए भारतीय महिलाओं में पेरिमेनोपॉज के लक्षण अक्सर 40 के शुरुआती सालों में ही दिखने लगते हैं।

पेरिमेनोपॉज औसतन लगभग 4 साल चलता है, लेकिन यह कुछ महीनों से लेकर 10 साल तक भी हो सकता है। अगर 40 से पहले पीरियड्स बहुत अनियमित हो जाएँ या बंद हो जाएँ, तो यह सामान्य पेरिमेनोपॉज न होकर समय से पहले मेनोपॉज (POI) भी हो सकता है, इसलिए डॉक्टर से ज़रूर मिलें।

पेरिमेनोपॉज के लक्षण (Perimenopause symptoms in Hindi)

हर महिला में लक्षण अलग होते हैं, और वे आते-जाते रहते हैं। किसी महीने सब ठीक लगता है, तो अगले महीने कई परेशानियाँ एक साथ। सबसे आम लक्षण ये हैं:

1. पीरियड्स में बदलाव

यह सबसे पहला और सबसे आम संकेत है:

  • पीरियड्स जल्दी-जल्दी आना (जैसे हर 21-24 दिन), या देर से आना
  • कुछ महीने पीरियड न आना, फिर अचानक आ जाना
  • ब्लीडिंग पहले से बहुत ज़्यादा या बहुत कम होना, थक्के आना
  • पीरियड से पहले की परेशानी (PMS), जैसे स्तनों में दर्द, पेट फूलना, मूड ख़राब होना, बढ़ जाना

और पढ़ें: अनियमित पीरियड्स और मेनोपॉज (अंग्रेज़ी में)।

2. अचानक गर्मी लगना (हॉट फ्लैश) और रात में पसीना

चेहरे, गर्दन और छाती में अचानक गर्मी की लहर, पसीना और दिल की धड़कन तेज़ होना। रात में ऐसा होने पर कपड़े भीग सकते हैं। मुंबई जैसी नमी वाली जगहों पर कई महिलाएँ इसे मौसम की उमस समझकर नज़रअंदाज़ कर देती हैं।

3. नींद की परेशानी

रात 3-4 बजे आँख खुल जाना और फिर नींद न आना पेरिमेनोपॉज में बहुत आम है, भले ही रात में पसीना न आए। प्रोजेस्टेरोन कम होना, रात का पसीना और मन की चिंता, तीनों इसके कारण हो सकते हैं।

4. मूड में बदलाव, चिड़चिड़ापन और घबराहट

बिना वजह ग़ुस्सा, रोना आना, नई घबराहट (एंग्ज़ायटी), मन उदास रहना या पहले जैसा आत्मविश्वास न रहना। जिन महिलाओं को पहले ज़्यादा PMS या डिलीवरी के बाद डिप्रेशन हुआ हो, उन्हें इस समय मूड की परेशानी ज़्यादा हो सकती है। ये "कमज़ोरी" नहीं, हार्मोन से जुड़े बदलाव हैं, और इनका इलाज संभव है।

5. भूलना और ध्यान न लगना (ब्रेन फ़ॉग)

नाम या शब्द याद न आना, काम पर ध्यान न लगना। यह आमतौर पर अस्थायी होता है।

6. थकान, जोड़ों में दर्द और वज़न

बिना वजह थकान, सुबह उंगलियों और घुटनों में अकड़न, और पेट के आसपास वज़न बढ़ना। भारत में विटामिन D की कमी, खून की कमी (एनीमिया) और थायरॉइड की समस्या भी इस उम्र में आम हैं, जो ऐसे ही लक्षण पैदा करती हैं। इसलिए हर लक्षण को सिर्फ़ पेरिमेनोपॉज मानने से पहले इनकी जाँच ज़रूरी है।

7. योनि में सूखापन, पेशाब और सेक्स से जुड़े बदलाव

योनि में सूखापन, संबंध के समय दर्द, सेक्स की इच्छा कम होना, बार-बार पेशाब का संक्रमण (UTI) या बार-बार पेशाब जाने की ज़रूरत। कई महिलाएँ ये लक्षण शर्म के कारण छिपाती हैं, जबकि इनका इलाज आसान और असरदार है। सिरदर्द, दिल की धड़कन तेज़ महसूस होना और बाल पतले होना भी इस दौर में आम हैं।

पेरिमेनोपॉज और मेनोपॉज में क्या फ़र्क है?

पेरिमेनोपॉज में पीरियड्स अभी आते हैं, लेकिन अनियमित, और गर्भ ठहर सकता है। मेनोपॉज में लगातार 12 महीने पीरियड नहीं आया होता और प्राकृतिक गर्भधारण नहीं होता। पूरी जानकारी हिंदी में: मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) क्या है?

क्या पेरिमेनोपॉज में गर्भ ठहर सकता है?

हाँ। पीरियड्स अनियमित होने पर भी कभी-कभी अंडा बनता है, इसलिए गर्भधारण संभव है। अगर आप गर्भ नहीं चाहतीं, तो गर्भनिरोधक जारी रखें: आमतौर पर 50 साल से कम उम्र में आख़िरी पीरियड के 2 साल बाद तक, और 50 के बाद 1 साल तक। आपके लिए कौन सा तरीका सही है, यह डॉक्टर के साथ तय करें।

पेरिमेनोपॉज की जाँच कैसे होती है?

45 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं में पेरिमेनोपॉज की पहचान आमतौर पर लक्षणों और पीरियड्स के पैटर्न से ही हो जाती है, जैसा ब्रिटेन की NICE गाइडलाइन भी सलाह देती है। FSH जैसे हार्मोन की एक बार की ब्लड टेस्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि इस दौर में हार्मोन रोज़ बदलते रहते हैं।

फिर भी डॉक्टर दूसरी वजहों को बाहर करने के लिए कुछ जाँचें करवा सकते हैं:

  • थायरॉइड (TSH), हीमोग्लोबिन और आयरन
  • विटामिन D और B12
  • शुगर और कोलेस्ट्रॉल
  • ज़्यादा या अनियमित ब्लीडिंग हो तो पेल्विक अल्ट्रासाउंड

45 साल से कम उम्र में लक्षण हों, तो हार्मोन की जाँच ज़्यादा उपयोगी होती है। और पढ़ें: पेरिमेनोपॉज टेस्ट (अंग्रेज़ी में)। डॉक्टर से मिलने से पहले 2-3 महीने अपने पीरियड्स और लक्षण लिख लें, इससे सही सलाह देना आसान होता है।

पेरिमेनोपॉज में क्या मदद करता है?

1. रोज़मर्रा की आदतें

  • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: हफ़्ते में 2-3 बार वज़न उठाने वाली कसरत मांसपेशियों, हड्डियों, वज़न और मूड, सभी के लिए अच्छी है। साथ में रोज़ चलना या योग।
  • हर खाने में प्रोटीन: दाल, चना, राजमा, पनीर, दही, अंडा, मछली।
  • कैल्शियम और विटामिन D: दूध, दही, रागी, तिल, हरी सब्ज़ियाँ और थोड़ी धूप; ज़रूरत हो तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट।
  • ट्रिगर पहचानें: चाय-कॉफ़ी, शराब और बहुत तीखा खाना कई महिलाओं में गर्मी बढ़ाते हैं।
  • नींद: तय समय पर सोना-जागना, ठंडा और हवादार कमरा, सूती कपड़े, सोने से पहले स्क्रीन कम।
  • धूम्रपान छोड़ें: इससे हॉट फ्लैश और हड्डियों का नुकसान दोनों बढ़ते हैं।

2. बिना हार्मोन वाले विकल्प

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT), यानी एक तरह की काउंसलिंग, हॉट फ्लैश, नींद और मूड में मदद करती है। जो महिलाएँ हार्मोन नहीं ले सकतीं या नहीं लेना चाहतीं, उनके लिए डॉक्टर कुछ बिना हार्मोन वाली दवाएँ भी लिख सकते हैं। योनि के सूखेपन में मॉइस्चराइज़र और लुब्रिकेंट राहत देते हैं।

कुछ महिलाएँ हल्के लक्षणों के लिए सप्लीमेंट आज़माती हैं। उदाहरण के लिए, NuHer का MENOVITA हॉट फ्लैश, रात के पसीने, नींद और मूड को सपोर्ट करने के लिए बनाया गया है। सप्लीमेंट का असर हर महिला में अलग होता है और ये दूसरी दवाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं, इसलिए शुरू करने से पहले डॉक्टर से पूछें।

3. हार्मोन थेरेपी (HRT)

हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) हॉट फ्लैश और रात के पसीने का सबसे असरदार इलाज है, और इसे पेरिमेनोपॉज में भी शुरू किया जा सकता है, यानी पीरियड्स पूरी तरह बंद होने का इंतज़ार ज़रूरी नहीं। यह नींद, मूड, जोड़ों के दर्द और योनि के सूखेपन में भी मदद करती है और हड्डियों को कमज़ोर होने से बचाती है। ज़्यादातर स्वस्थ महिलाओं में, अगर इसे 60 साल से पहले या मेनोपॉज के 10 साल के अंदर शुरू किया जाए, तो फ़ायदे जोखिम से ज़्यादा होते हैं।

लेकिन HRT हर किसी के लिए नहीं है। कुछ प्रकार की HRT से खून का थक्का बनने और ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम थोड़ा बढ़ सकता है। जिन्हें ब्रेस्ट कैंसर, खून का थक्का, स्ट्रोक या लिवर की गंभीर बीमारी हो चुकी हो, या बिना कारण ब्लीडिंग हो रही हो, उन्हें HRT नहीं लेनी चाहिए या सिर्फ़ विशेषज्ञ की देखरेख में ही इस पर विचार करना चाहिए। पेरिमेनोपॉज में पीरियड्स अभी आ रहे होते हैं, इसलिए HRT लेने का तरीका मेनोपॉज के बाद से अलग हो सकता है। HRT हमेशा डॉक्टर की जाँच और पर्चे के बाद ही लें। और पढ़ें: HRT के बारे में।

डॉक्टर को कब दिखाएँ?

  • लक्षण आपकी नींद, काम, रिश्तों या मन पर असर डाल रहे हों
  • बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग (हर 1-2 घंटे में पैड भीगना), बड़े थक्के, या चक्कर और कमज़ोरी
  • पीरियड्स के बीच में या संबंध के बाद ब्लीडिंग
  • 45 से पहले पीरियड्स बहुत अनियमित हो जाएँ या बंद हो जाएँ
  • लगातार उदासी, घबराहट या सब कुछ संभाल न पाने की भावना

12 महीने पीरियड बंद रहने के बाद कोई भी ब्लीडिंग हो, स्तन में गाँठ महसूस हो, सीने में दर्द हो, या ख़ुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आएँ, तो देर न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें।

महिलाएँ अक्सर पूछती हैं

Perimenopause meaning in Hindi क्या है?

पेरिमेनोपॉज का हिंदी में मतलब है "रजोनिवृत्ति से पहले का समय" या मेनोपॉज की ओर बढ़ने का दौर। इस दौरान हार्मोन ऊपर-नीचे होते हैं और पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। यह आख़िरी पीरियड के 12 महीने बाद ख़त्म होता है, जब मेनोपॉज की पुष्टि होती है। ज़्यादातर भारतीय महिलाओं में यह 40 से 45 की उम्र के बीच शुरू होता है।

पेरिमेनोपॉज के पहले लक्षण क्या हैं?

सबसे पहला संकेत अक्सर पीरियड्स के अंतर में बदलाव होता है, जैसे पीरियड पहले से जल्दी या देर से आना। इसके साथ नींद टूटना, PMS बढ़ना, नई घबराहट और रात में पसीना शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। कई बार मूड और नींद के बदलाव पीरियड्स में बदलाव से भी पहले दिखते हैं।

पेरिमेनोपॉज कितने साल चलता है?

औसतन लगभग 4 साल, लेकिन यह कुछ महीनों से लेकर 10 साल तक हो सकता है। हॉट फ्लैश आमतौर पर बाद के चरण में सबसे ज़्यादा होते हैं, और मेनोपॉज के कुछ साल बाद कई लक्षण धीरे-धीरे कम हो जाते हैं।

क्या पेरिमेनोपॉज के लिए ब्लड टेस्ट ज़रूरी है?

45 से ज़्यादा उम्र में आमतौर पर नहीं, क्योंकि पहचान लक्षणों से हो जाती है और हार्मोन का स्तर रोज़ बदलता है। लेकिन थायरॉइड, खून की कमी और विटामिन D जैसी जाँचें दूसरी वजहों को बाहर करने के लिए उपयोगी हैं। 45 से कम उम्र में डॉक्टर हार्मोन की जाँच भी करवा सकते हैं।

NuHer से सलाह लें

अगर आपको लगता है कि आप पेरिमेनोपॉज में हैं, तो मुफ़्त मेनोपॉज टेस्ट से शुरुआत करें या सिम्पटम ट्रैकर में अपने लक्षण नोट करें। फिर NuHer की डॉक्टर से अपॉइंटमेंट बुक करें: नरीमन पॉइंट, मुंबई के क्लिनिक में मिलें या पूरे भारत से वीडियो पर सलाह लें। WhatsApp: +91 88799 88776।

यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है और आपके डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं लेती।

References

  1. National Institute for Health and Care Excellence (NICE). Menopause: identification and management (NG23). nice.org.uk/guidance/ng23
  2. Harlow SD, Gass M, Hall JE, et al. Executive summary of the Stages of Reproductive Aging Workshop + 10: addressing the unfinished agenda of staging reproductive aging. Menopause. 2012;19(4):387-395. pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC3340903/
  3. Meeta M, Digumarti L, Agarwal N, et al. Clinical practice guidelines on menopause: an executive summary and recommendations: Indian Menopause Society 2019-2020. J Midlife Health. 2020;11(2):55-95. pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC7688016/
  4. Ahuja M. Age of menopause and determinants of menopause age: a PAN India survey by IMS. J Midlife Health. 2016;7(3):126-131. pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC5051232/
  5. NHS. Menopause and perimenopause: symptoms. nhs.uk/conditions/menopause-and-perimenopause/symptoms/

Medically reviewed by

Dr Priyanka Mehta, MBBS, MD, MRCOG (UK), Gynaecologist

NuHer women's midlife clinic, Nariman Point, Mumbai

NuHer guides

Want to talk it through with a doctor? Book a consultation at our Nariman Point clinic or by video, Monday to Saturday, 10 am to 7 pm.

This article is for general information and does not replace advice from your own doctor.

Dealing with this? NuHer can help.

Speak to a specialist

Get a personalised menopause plan

See a NuHer menopause doctor at our Nariman Point clinic in Mumbai, or by video from anywhere in India.

Book a consultation Take the free assessment

Supplements are not a substitute for medical care. Speak to your doctor if you take other medicines or HRT.